भारतीय डेरिवेटिव सेगमेंट में सेबी के नए नियम: पारदर्शिता और स्थिरता की दिशा में कदम
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 30 अगस्त को डेरिवेटिव सेगमेंट में नए नियम लागू करने की घोषणा की है। इन नए नियमों का उद्देश्य डेरिवेटिव बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और सुनिश्चित करना है कि केवल वही स्टॉक्स इस सेगमेंट में ट्रेडिंग के योग्य हों, जिनमें पर्याप्त तरलता और गहराई हो। आइए जानते हैं कि इन नए मानदंडों में क्या बदलाव आया है और यह बाजार और निवेशकों पर क्या प्रभाव डालेगा।
नए मानदंड: क्या बदल रहा है?
1. औसत तिमाही सिग्मा ऑर्डर आकार (MQSOS) का तीन गुना बढ़ोतरी
पहले MQSOS की सीमा 25 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दिया गया है। MQSOS किसी स्टॉक की तरलता को मापने का एक प्रमुख मानदंड है, और इसकी उच्च सीमा यह सुनिश्चित करती है कि स्टॉक की कीमतों में हेरफेर करना कठिन हो। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में औसत बाजार कारोबार में 3.5 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।
2. न्यूनतम बाजार व्यापी स्थिति सीमा (MWPL) का तीन गुना विस्तार
पिछले छह महीनों के दौरान किसी स्टॉक का MWPL अब 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह बाजार पूंजीकरण में हुई 2.8 गुना वृद्धि को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे स्टॉक्स की ट्रेडिंग में अधिक गहराई और स्थिरता आएगी।
3. औसत दैनिक डिलीवरी मूल्य (ADDV) में 3.5 गुना वृद्धि
नकद खंड में किसी स्टॉक का ADDV अब न्यूनतम 35 करोड़ रुपये होना चाहिए, जो पहले 10 करोड़ रुपये था। यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में बाजार में कुल डिलीवरी वॉल्यूम में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई है, जिससे बड़े वॉल्यूम वाले स्टॉक्स की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
डेरिवेटिव सेगमेंट से निकास के नए नियम
अगर कोई स्टॉक नए मानदंडों को लगातार तीन महीनों तक पूरा करने में विफल रहता है, तो उसे डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर कर दिया जाएगा। इस स्थिति में, उस स्टॉक पर कोई नया अनुबंध जारी नहीं होगा, लेकिन मौजूदा अनुबंधों को उनकी समाप्ति तक व्यापार की अनुमति दी जाएगी। यह बदलाव निवेशकों के लिए इस बात का संकेत है कि उन्हें उन स्टॉक्स में निवेश करना चाहिए, जिनमें दीर्घकालिक स्थिरता और तरलता हो।
सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव के लिए नया उत्पाद-सफलता ढांचा
सेबी ने सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव के लिए एक नया उत्पाद-सफलता ढांचा भी पेश किया है, जो इंडेक्स डेरिवेटिव के लिए पहले से मौजूद ढांचे के समान है। इस नए ढांचे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वे स्टॉक्स ही डेरिवेटिव सेगमेंट में बने रहें, जो तरलता और अन्य मानदंडों के अनुसार योग्य हों।
निष्कर्ष
सेबी के इन नए संशोधनों का उद्देश्य भारतीय डेरिवेटिव बाजार की पारदर्शिता और स्थिरता को बढ़ावा देना है। नए मानदंडों के तहत, केवल उच्च गुणवत्ता वाले और तरल स्टॉक्स को ही डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग की अनुमति मिलेगी, जिससे बाजार में हेरफेर की संभावना कम होगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए, निवेशकों को अपनी निवेश रणनीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए और बाजार के नए नियमों के साथ तालमेल बनाए रखना चाहिए।