धारावी पुनर्विकास 

सुप्रीम कोर्ट ने धारावी पुनर्विकास पर रोक लगाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने धारावी पुनर्विकास 

सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च को अदाणी ग्रुप को धारावी पुनर्विकास परियोजना को जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। अदालत ने कहा कि यह प्रोजेक्ट “अदालती आदेशों के अधीन” रहेगा और किसी भी वित्तीय गड़बड़ी से बचने के लिए सभी लेन-देन एक एस्क्रो अकाउंट में दर्ज किए जाएंगे।

धारावी पुनर्विकास 

SecLink Group की याचिका और आरोप

सेशेल्स स्थित SecLink Group ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार ने टेंडर की शर्तों में बदलाव कर अदाणी ग्रुप को अनुचित लाभ दिया।

मुख्य बिंदु

  • 2018 SecLink ने ₹7,200 करोड़ की बोली लगाई थी, जिसे ₹8,640 करोड़ तक बढ़ाने की पेशकश भी की थी।
  • 2022 महाराष्ट्र सरकार ने पुराना टेंडर रद्द कर नया टेंडर जारी किया, जिसमें अदाणी ग्रुप ने ₹5,069 करोड़ की बोली लगाकर ठेका हासिल किया।
  • आरोप सरकार ने अदाणी को फायदा पहुंचाने के लिए कम कीमत वाले टेंडर को मंजूरी दी।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

धारावी पुनर्विकास 

  • अदाणी ग्रुप को सभी वित्तीय लेन-देन एक एस्क्रो अकाउंट में रखना होगा।
  • अगर भविष्य में प्रोजेक्ट पर कोई निर्णय बदला जाता है, तो लेन-देन को नियंत्रित किया जा सकेगा।
  • महाराष्ट्र सरकार को जवाब देना होगा कि क्या टेंडर की शर्तें जानबूझकर बदली गई थीं?

बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

दिसंबर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अदाणी ग्रुप के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके बाद SecLink ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

आगे की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है, और मामले की अगली सुनवाई 25 मई 2025 को होगी।

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