विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार हाल ही में 8.48 अरब डॉलर की भारी गिरावट के साथ 644.39 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। RBI द्वारा रुपये को सपोर्ट देने के लिए डॉलर सेलिंग ने इस गिरावट को और तेज कर दिया है।
रुपये की कमजोरी और डॉलर की मजबूती का प्रभाव
Rupee vs Dollar
- 27 दिसंबर को, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 85.79 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा।
- यह फरवरी 2023 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 में भी रुपये की स्थिति में सुधार की संभावना कम है।
RBI Intervention
रुपये को स्थिर रखने के लिए RBI ने डॉलर सेलिंग के माध्यम से हस्तक्षेप किया, जिसका परिणाम विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के रूप में सामने आया।
अन्य संपत्तियों पर असर
- Gold Reserves
सोने का भंडार 2.33 अरब डॉलर घटकर 65.73 अरब डॉलर पर आ गया। - SDR (Special Drawing Rights)
SDR 11.2 करोड़ डॉलर घटकर 17.88 अरब डॉलर रह गया। - IMF Reserves
IMF के पास भारत का भंडार 2.3 करोड़ डॉलर घटकर 4.22 अरब डॉलर हो गया।
सितंबर 2024 में उच्चतम स्तर पर था भंडार
सितंबर 2024 में, विदेशी मुद्रा भंडार 704.88 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर था। लेकिन अब यह गिरावट के साथ छह महीने के निचले स्तर पर आ चुका है।
2025 की चुनौतियां
Donald Trump Policies
अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महंगाई बढ़ाने वाली नीतियां और टैरिफ की धमकियों के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा प्रभाव भारत के रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ेगा।
अन्य जोखिम
- महंगाई और ब्याज दरें उच्च महंगाई और संभावित वैश्विक मंदी।
- डॉलर की मजबूती डॉलर के मजबूत बने रहने से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट, रुपये की कमजोरी, और वैश्विक अनिश्चितताएं भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 2025 में बड़ी चुनौतियां पेश कर सकती हैं। RBI और सरकार को रणनीतिक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए सतर्कता आवश्यक है।