अप्रैल में कई छुट्टियों
शुक्रवार को वैश्विक शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ देखने को मिला। डाव जोन्स और नैस्डैक जैसे प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है। इस वैश्विक संकट के बीच, अब निवेशकों की नजर सोमवार को खुलने वाले बाजार पर है—जो एक बार फिर से उथल-पुथल भरा रह सकता है।
अप्रैल में बाजार की चाल तय करेंगी छुट्टियां
अप्रैल 2025 में दो बड़ी राष्ट्रीय छुट्टियों के कारण बाजार बंद रहेगा
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10 अप्रैल (गुरुवार) महावीर जयंती
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14 अप्रैल (सोमवार) डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जयंती
इसका मतलब है कि 9 अप्रैल को आखिरी ट्रेडिंग सेशन के बाद, बाजार 11 अप्रैल को खुलेगा और फिर सीधा 15 अप्रैल को एक्शन देखने को मिलेगा। इन गैप्स के बीच बाजार में अत्यधिक वोलैटिलिटी देखी जा सकती है, खासकर विदेशी संकेतों और घरेलू ट्रेंड्स को लेकर।
आने वाले महीनों की प्रमुख मार्केट हॉलिडेज़ (NSE-BSE)
निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि 2025 में शेयर बाजार किन-किन दिनों में बंद रहेगा। यहाँ है उन प्रमुख शेयर बाजार छुट्टियों की सूची
दिनांक | दिन | अवकाश का नाम |
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26 फरवरी 2025 | बुधवार | महाशिवरात्रि |
14 मार्च 2025 | शुक्रवार | होली |
31 मार्च 2025 | सोमवार | ईद-उल-फितर |
10 अप्रैल 2025 | गुरुवार | श्री महावीर जयंती |
14 अप्रैल 2025 | सोमवार | डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जयंती |
18 अप्रैल 2025 | शुक्रवार | गुड फ्राइडे |
01 मई 2025 | गुरुवार | महाराष्ट्र दिवस |
15 अगस्त 2025 | शुक्रवार | स्वतंत्रता दिवस |
27 अगस्त 2025 | बुधवार | गणेश चतुर्थी |
02 अक्टूबर 2025 | गुरुवार | गांधी जयंती / दशहरा |
21 अक्टूबर 2025 | मंगलवार | दिवाली (लक्ष्मी पूजन) |
22 अक्टूबर 2025 | बुधवार | दिवाली बलिप्रतिपदा |
05 नवंबर 2025 | बुधवार | प्रकाश पर्व (गुरु नानक जयंती) |
25 दिसंबर 2025 | गुरुवार | क्रिसमस |
क्या निवेशक तैयार हैं इस उतार-चढ़ाव भरे बाजार के लिए?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि गैप अप और गैप डाउन ओपनिंग्स इन छुट्टियों के दौरान आम हो सकती हैं, जिससे इंट्राडे और शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को अधिक सतर्क रहना होगा। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें और स्टॉप लॉस का सख्ती से पालन करें।
निष्कर्ष
अप्रैल 2025 बाजार के लिए एक संवेदनशील महीना हो सकता है, जहां छुट्टियों के बीच सीमित ट्रेडिंग सेशन और वैश्विक घटनाक्रम मिलकर वोलैटिलिटी को बढ़ावा दे सकते हैं। ऐसे में विवेकपूर्ण रणनीति अपनाना और बाज़ार के ट्रेंड्स पर नजर रखना बेहद जरूरी है।