Bitcoin की ऐतिहासिक तेजी
Bitcoin ने पहली बार 1,00,000 डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) का आंकड़ा पार किया है। इस उछाल का मुख्य कारण हाल ही में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत और उनके क्रिप्टो-समर्थक नीतियां मानी जा रही हैं।
राजनीतिक समर्थन का प्रभाव
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US SEC चेयरमैन नियुक्ति
ट्रंप ने Paul Atkins को US SEC का चेयरमैन बनाया है, जो क्रिप्टोकरेंसी के बड़े समर्थक हैं। -
Elon Musk के नेतृत्व में नया विभाग
ट्रंप ने Department of Government Efficiency बनाने की मंजूरी दी है, जो क्रिप्टो एडॉप्शन के लिए सकारात्मक माहौल बना सकता है।
Bitcoin और अन्य क्रिप्टोकरेंसी का प्रदर्शन
Bitcoin की स्थिति
- पिछले महीने की वृद्धि 50% से अधिक
- मार्केट कैप 2 ट्रिलियन डॉलर के पार
- साल 2024 की ग्रोथ 144%
अन्य क्रिप्टोकरेंसी का प्रदर्शन
- SOL और XRP जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी भी अपने All-Time High पर हैं।
Bitcoin की तेजी के कारण
1. Bitcoin ETF में निवेश
Bitcoin की बढ़ती मांग का एक बड़ा कारण ETF (Exchange-Traded Fund) में निवेश है।
- हाल ही में एक दिन में 67.6 करोड़ डॉलर का निवेश दर्ज किया गया।
- यह संस्थागत निवेशकों की बढ़ती रुचि का संकेत है।
2. राजनीतिक समर्थन
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में क्रिप्टोकरेंसी को बढ़ावा देने वाले फैसले, जैसे नियामक स्पष्टता और क्रिप्टो-फ्रेंडली पॉलिसी, इस तेजी के प्रमुख कारण हैं।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य का अनुमान
विशेषज्ञों की राय
- Mudrex के CEO Edul Patel
- Bitcoin जल्द ही 1.20 लाख डॉलर तक पहुंच सकता है।
- Bernstein रिपोर्ट
- Bitcoin की कीमतें अगले दशक में 10 लाख डॉलर (8.4 करोड़ रुपये) तक पहुंचने की संभावना।
Bernstein का प्राइस प्रेडिक्शन
वर्ष | अनुमानित मूल्य (डॉलर) |
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2025 | 2,00,000 |
2029 | 5,00,000 |
2033 | 10,00,000 |
भारतीय निवेशकों के लिए अवसर
वर्तमान परिदृश्य
- भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन को लेकर असमंजस की स्थिति है।
- वैश्विक स्वीकृति से भारतीय निवेशकों को लाभ मिल सकता है।
विशेषज्ञ सलाह
- लॉन्ग-टर्म प्लानिंग क्रिप्टो में दीर्घकालिक निवेश पर ध्यान दें।
- मार्केट साइकिल पर नजर मार्केट ट्रेंड्स को समझें और सही समय पर निवेश करें।
- पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन क्रिप्टोकरेंसी के साथ अन्य एसेट्स में निवेश करें।
- रिलायबल एक्सचेंज चुनें सुरक्षित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का उपयोग करें।
- नियामकीय बदलावों पर ध्यान भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियामकीय परिवर्तनों को समझें।