अमेरिकी टैरिफ के जवाब
नई दिल्ली अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर का अब सीधा असर भारत पर देखने को मिल सकता है। अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि चीन अब अपना निर्यात भारत जैसे देशों की ओर शिफ्ट कर सकता है।
इस संभावित “चाइनीज़ इंपोर्ट फ्लड” से बचने के लिए भारत सरकार ने निगरानी और रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है।
1. अमेरिकी टैरिफ का असर चीन की रणनीति में बदलाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को चीनी वस्तुओं पर 10% से 50% तक का टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद:
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5 अप्रैल से 10% बेसलाइन ड्यूटी लागू हो गई है।
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9 अप्रैल से अतिरिक्त टैरिफ लागू किए गए हैं।
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चीन पर कुल मिलाकर 54% तक का टैरिफ लग चुका है।
इसके जवाब में चीन ने भी कड़ा रुख अपनाया है
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अमेरिका के सामानों पर 34% का टैरिफ लगाया।
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रेयर अर्थ एलिमेंट्स के निर्यात पर आंशिक रोक।
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30 अमेरिकी डिफेंस कंपनियों पर प्रतिबंध।
2. भारत सरकार की सतर्कता और तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत सरकार ने तेजी से एक्शन लिया है:
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वाणिज्य मंत्रालय ने वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल की अध्यक्षता में कई बैठकों का आयोजन शुरू किया है।
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DGTR (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज) को विशेष निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
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एंटी-डंपिंग नियमों को और अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि अगर चीनी उत्पाद सस्ते दरों पर भारत में घुसेंगे, तो देश की घरेलू इंडस्ट्री को भारी नुकसान हो सकता है।
3. भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ती चिंता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 के अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच:
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चीन से आयात में 10.4% वृद्धि होकर 103.70 अरब डॉलर पहुंच गया।
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जबकि भारत से चीन को निर्यात 15.7% गिरकर 12.70 अरब डॉलर रह गया।
इससे भारत का ट्रेड डेफिसिट 90 अरब डॉलर से अधिक हो गया है, जो नीति निर्धारकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन चुका है।
4. राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा:
“चीन ने गलत तरीके से इस गेम को खेला है और वे अब घबरा गए हैं।”
चीन ने भी पलटवार करते हुए अमेरिका की कई टेक और डिफेंस कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए। इसके अलावा टिकटॉक से जुड़ी डील पर रोक लगाकर टेक सेक्टर में भी तनाव बढ़ा दिया गया है।
5. आगे क्या? भारत के लिए संभावित नीति कदम
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले हफ्तों में भारत सरकार:
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कस्टम ड्यूटी में बदलाव
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नॉन-टैरिफ बैरियर्स को लागू कर सकती है
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और सेक्टर-विशेष एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर सकती है।
इसके साथ ही सरकार “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं को मज़बूती से आगे बढ़ाने की योजना बना रही है ताकि घरेलू उद्योग को चीनी चुनौती से बचाया जा सके।
निष्कर्ष
अमेरिका और चीन के बीच का यह व्यापार युद्ध अब तीसरे देशों के लिए चुनौती बनता जा रहा है, और भारत उसके फ्रंटलाइन पर है। सरकार ने निगरानी और प्रतिक्रिया की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन आगे की स्थिति बाजार, नीति और वैश्विक समीकरणों पर निर्भर करेगी।