चीन का अमेरिका को करारा जवाब
चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के जवाब में अब अपना रुख और सख्त कर लिया है। नई घोषणा के तहत, चीन 10 अप्रैल से अमेरिका से आयातित सभी वस्तुओं पर 34 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाएगा। यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका पहले ही चीन पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है, जिससे कुल टैरिफ का आंकड़ा 54 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर कंट्रोल टेक और डिफेंस सेक्टर पर असर
चीन ने अपने एक्सपोर्ट कंट्रोल को और मजबूत करते हुए कुछ महत्वपूर्ण rare earth elements के निर्यात पर रोक लगाने की घोषणा की है। इसमें समारियम, गैडोलीनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यिट्रियम शामिल हैं। ये सभी तत्व सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और रक्षा क्षेत्र की तकनीक के लिए अनिवार्य हैं। चीन का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिका की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी कंपनियों की एंट्री पर ब्रेक नई लिस्टें तैयार
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया है कि वह 16 अमेरिकी संस्थाओं को अपनी एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में शामिल कर रहा है। इसके साथ ही, 11 अमेरिकी कंपनियों को ‘अनरिलायबल एंटिटी लिस्ट’ में डाला गया है, जिसका मतलब है कि अब वे चीन में व्यापार नहीं कर सकेंगी और न ही चीनी टेक्नोलॉजी तक उनकी पहुंच रह पाएगी।
चिकित्सा उपकरणों की जांच हेल्थकेयर सेक्टर पर निगरानी
चीन ने अमेरिका से आने वाले चिकित्सा उपकरणों की दो ट्रेड इन्वेस्टिगेशन शुरू की हैं। यह कदम ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिकी मेडिकल कंपनियां चीन के हेल्थकेयर मार्केट में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में लगी हैं। इस जांच से उनके लिए चीन में व्यापार करना मुश्किल हो सकता है।
कृषि आयात पर रोक अमेरिकी फार्मर्स को झटका
चीन की कस्टम एजेंसी ने अमेरिका से आने वाले कुछ अहम कृषि उत्पादों जैसे कि चिकन के आयात पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह फैसला अमेरिकी किसानों और कृषि व्यवसायों को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष
चीन ने अमेरिका की नीतियों का जवाब सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि ठोस एक्शन लेकर दिया है। टैरिफ बढ़ाने से लेकर एक्सपोर्ट कंट्रोल तक, चीन ने अपने हर कदम से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी व्यापारिक दबाव में झुकने वाला नहीं है। आने वाले समय में यह ट्रेड वॉर और भी अधिक गंभीर हो सकता है।