भारत में क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में बूम
भारत में डिजिटल मुद्राओं का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। CoinGecko की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर 2024 तिमाही में भारत के चार प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजों का ट्रेडिंग वॉल्यूम $1.9 बिलियन तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में दोगुना है।
यह आंकड़ा बताता है कि नियामक अनिश्चितता के बावजूद भारत में क्रिप्टोकरेंसी की स्वीकृति लगातार बढ़ रही है।
युवाओं के बीच बढ़ती दिलचस्पी
- नई पीढ़ी क्रिप्टो ट्रेडिंग सीख रही है
भारत में कई ऑनलाइन और ऑफलाइन अकादमियां खुल रही हैं, जहां युवा क्रिप्टो ट्रेडिंग और एनालिसिस सीख रहे हैं। - निवेशकों की सोच बदली
पहले जहां क्रिप्टो सिर्फ एक ‘स्पेकुलेटिव एसेट’ था, अब इसे वित्तीय स्वतंत्रता और संपत्ति बढ़ाने के मौके के रूप में देखा जा रहा है।
भारत में क्रिप्टोकरेंसी का नियामक ढांचा
- अभी तक कोई स्पष्ट क्रिप्टो नीति नहीं भारत सरकार ने क्रिप्टो को लेकर कोई ठोस कानून नहीं बनाया है।
- 30% टैक्स लागू क्रिप्टो मुनाफे पर 30% टैक्स और 1% TDS को लेकर निवेशकों में चिंता बनी हुई है।
- अन्य देशों से तुलना
- अमेरिका, यूरोप, और जापान जैसे देशों ने या तो क्रिप्टो के लिए स्पष्ट कानून बना दिए हैं या इसे मौजूदा सिक्योरिटीज कानूनों में शामिल कर लिया है।
- भारत में न तो इसे कानूनी दर्जा मिला है और न ही इसे बैन किया गया है, जिससे निवेशकों की स्थिति असमंजस में बनी हुई है।
क्रिप्टो बाजार में अस्थिरता लेकिन आत्मविश्वास बरकरार
क्रिप्टो बाजार में उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा रहता है।
- बिटक्वॉइन ने 2025 की शुरुआत में $109,000 का स्तर छू लिया, लेकिन फिर गिरावट आई।
- एथेरियम और अन्य डिजिटल मुद्राओं में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया।
क्या भविष्य में भारत क्रिप्टो को पूरी तरह स्वीकार करेगा?
हालांकि क्रिप्टो बाजार में अभी भी अस्थिरता और कानूनी अस्पष्टता बनी हुई है, लेकिन भारतीय निवेशकों का आत्मविश्वास मजबूत है। वे इसे लंबी अवधि के निवेश के रूप में देख रहे हैं और सरकार की अगली नीति का इंतजार कर रहे हैं।