सरकार 5 सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी

सरकार 5 सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी, जानें पूरी योजना

सरकार 5 सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी

केंद्र सरकार 5 सरकारी बैंकों में अपनी 20% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य SEBI के नियमों का पालन करना और बैंकों में पारदर्शिता व कार्यक्षमता बढ़ाना है। इस प्रक्रिया में डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM), वित्तीय सेवा विभाग और संबंधित बैंक शामिल होंगे।

सरकार 5 सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी

सरकार हिस्सेदारी क्यों बेच रही है?

SEBI के नियम शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए प्रमोटरों की हिस्सेदारी 75% से अधिक नहीं हो सकती
निवेशक हित अधिक सार्वजनिक भागीदारी से बैंकों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी
राजस्व वृद्धि सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिसे विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

किन बैंकों में हिस्सेदारी बेची जाएगी?

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इन 5 सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाएगी
बैंक ऑफ महाराष्ट्र
इंडियन ओवरसीज बैंक
यूको बैंक
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
पंजाब एंड सिंध बैंक

कैसे होगी हिस्सेदारी बिक्री?

सरकार दो तरीकों से अपनी हिस्सेदारी बेचेगी:

 ऑफर-फॉर-सेल (OFS)

 सरकार शेयर बाजार में अपने शेयर बेचकर निवेशकों को अवसर प्रदान करेगी
इससे बैंकों के शेयर बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी

सरकार 5 सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी

क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP)

 इसमें संस्थागत निवेशकों (म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, बैंक) को शेयर बेचे जाएंगे।
 इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी

25 फरवरी 2025 को DIPAM ने मर्चेंट बैंकरों से बोलियां आमंत्रित की थीं, जो इस बिक्री प्रक्रिया को सुचारू बनाएंगे। ये मर्चेंट बैंकर तीन साल के लिए नियुक्त किए जाएंगे, जिसे एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।

इस फैसले का असर क्या होगा?

बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी, जिससे निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे
बैंकों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा
सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिसे आर्थिक सुधारों और विकास परियोजनाओं में लगाया जाएगा

निष्कर्ष

सरकार का यह फैसला बैंकिंग सेक्टर में सुधार लाने और निवेशकों को अधिक अवसर देने के लिए अहम कदम है। इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी

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