अमेरिका के रिसिप्रोकल टैरिफ
वर्तमान में भारतीय शेयर बाजार दबाव में है, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर रिसिप्रोकल टैरिफ लगाने की नीति है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ रही है, जिससे बाजार अस्थिर बना हुआ है।
SBI रिपोर्ट भारत पर संभावित प्रभाव
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिका द्वारा रिसिप्रोकल टैरिफ लागू किया जाता है, तो इसका भारतीय निर्यात पर केवल 3 से 3.5% तक प्रभाव पड़ेगा। इसका कारण यह है कि भारत ने अपने एक्सपोर्ट को विविधतापूर्ण बनाया है और विभिन्न बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ा ली है।
SBI की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि:
- भारतीय निर्यात मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों के माध्यम से प्रभावित हो सकता है।
- हालांकि, उच्च एक्सपोर्ट टारगेट के जरिए इस असर को कम किया जा सकता है।
- भारत यूरोप और अन्य बाजारों की ओर अपने निर्यात का विस्तार कर रहा है।
भारत की रणनीति नए ट्रेड पार्टनर और FTA
अमेरिका द्वारा 2 अप्रैल से रिसिप्रोकल टैरिफ लागू किए जाने हैं। इसके जवाब में भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है और नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश कर रहा है।
भारत ने हाल के वर्षों में 13 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन किए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
मॉरीशस
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
ऑस्ट्रेलिया
वर्तमान में कनाडा और यूरोपियन यूनियन के साथ भी FTA पर बातचीत जारी है।
निष्कर्ष
अमेरिका के रिसिप्रोकल टैरिफ से भारतीय एक्सपोर्ट पर सीमित प्रभाव पड़ेगा, लेकिन भारत पहले से ही वैकल्पिक बाजारों और नई व्यापारिक रणनीतियों पर काम कर रहा है। आने वाले महीनों में भारत के यूरोपीय और एशियाई बाजारों में विस्तार से वैश्विक व्यापार संतुलित रह सकता है।