फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग के नियमों में बदलाव
फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) सेगमेंट में अत्यधिक जोखिम होता है, और नए निवेशकों को जानकारी के अभाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने ट्रेडर्स की सुरक्षा के लिए फ्यूचर और ऑप्शन में “आउटस्टैंडिंग पोजीशन” की गणना की नई पद्धति का प्रस्ताव रखा है।
सेबी के प्रस्ताव का उद्देश्य
डेरिवेटिव ट्रेडिंग में हेरा-फेरी की संभावनाओं को कम करना।
ट्रेडिंग को संभावित मैनिपुलेशन से बचाना।
निवेशकों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी ट्रेडिंग अनुभव प्रदान करना।
क्या होगा बदलाव?
SEBI ने अपने कंसलटिंग पेपर में निम्नलिखित बदलावों का प्रस्ताव दिया है:
ओपन इंटरेस्ट फ्यूचर और ऑप्शन में बकाया पोजीशन की लिमिट तय की जाएगी।
मार्केट वाइड पोजिशन लिमिट (MWPL) को स्टॉक डेरिवेटिव सेगमेंट में संशोधित किया जाएगा।
ट्रेडिंग सेशन के दौरान पोजीशन की नियमित निगरानी के लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
SEBI क्यों कर रहा है ये बदलाव?
हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) और अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए SEBI को चिंता है कि कुछ प्रभावशाली कंपनियां बेहतर टेक्नोलॉजी का उपयोग कर बाजार में हेरा-फेरी कर सकती हैं।
SEBI का लक्ष्य है कि छोटे और नए निवेशकों को भारी नुकसान से बचाया जाए और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
इस बदलाव से ट्रेडर्स और निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?
छोटे निवेशकों के लिए सुरक्षा – नए नियम उन्हें बड़े जोखिमों से बचाएंगे।
बाजार में पारदर्शिता – हेराफेरी की संभावनाएं कम होंगी।
बड़े ट्रेडर्स के लिए सख्ती – बिना पर्याप्त पूंजी और अनुभव के भारी ट्रेडिंग करना मुश्किल होगा।
निष्कर्ष
SEBI का यह प्रस्ताव डेरिवेटिव मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाने और छोटे निवेशकों को हानि से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर यह नियम लागू होते हैं, तो फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग में अनावश्यक जोखिम कम होगा और बाजार में अधिक स्थिरता आएगी।