एडिशनल स्पेक्ट्रम सरेंडर की अनुमति

सरकार दे सकती है टेलीकॉम कंपनियों को एडिशनल स्पेक्ट्रम सरेंडर करने की अनुमति

टेलीकॉम कंपनियों को एडिशनल स्पेक्ट्रम सरेंडर की अनुमति

केंद्र सरकार टेलीकॉम कंपनियों को 2022 से पहले नीलामी में खरीदे गए अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को सरेंडर करने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कदम से वोडाफोन आइडिया को सबसे अधिक लाभ होने की संभावना है। कंपनी यदि अपने अतिरिक्त एयरवेव्स को सरेंडर कर पाती है, तो वह लगभग 40,000 करोड़ रुपये की बचत कर सकती है।

एडिशनल स्पेक्ट्रम सरेंडर की अनुमति

टेलीकॉम विभाग कर रहा है योजना पर चर्चा

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) इस प्रस्ताव पर आंतरिक स्तर पर चर्चा कर रहा है। इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के साथ बैठकें की जा रही हैं, ताकि इसका सही क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

इस नीति का उद्देश्य रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करना है। साथ ही, बीएसएनएल को भी इसमें शामिल कर सरकारी टेलीकॉम सेवाओं को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।

वोडाफोन आइडिया को होगा सबसे अधिक लाभ

एडिशनल स्पेक्ट्रम सरेंडर की अनुमति

यदि यह योजना लागू होती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा वोडाफोन आइडिया को मिलेगा।

जियो और एयरटेल अपनी अधिकांश स्पेक्ट्रम खरीदारी के लिए पहले ही प्रीपेड भुगतान कर चुके हैं।
वोडाफोन आइडिया अभी भी कई भुगतान करने की स्थिति में है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बना हुआ है।
 अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को सरेंडर करने से कंपनी 40,000 करोड़ रुपये की संभावित बचत कर सकती है।

सरकार पहले भी दे चुकी है राहत

दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने वोडाफोन आइडिया को 2021 से पहले खरीदे गए स्पेक्ट्रम के लिए बैंक गारंटी से छूट दी थी।

 इस कदम से टेलीकॉम कंपनियों को आर्थिक मजबूती मिली।
 वोडाफोन आइडिया ने इसे “टेलीकॉम कंपनियों के लिए बड़ी राहत” करार दिया था।

वित्तीय स्थिति में सुधार के संकेत

वोडाफोन आइडिया का शुद्ध घाटा दिसंबर तिमाही में घटकर 6,609 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 6,986 करोड़ रुपये था।
कंपनी की कुल आय 4% बढ़कर 11,117 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल यह 10,673 करोड़ रुपये थी।

निष्कर्ष

सरकार के इस संभावित कदम से वोडाफोन आइडिया की वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है।
40,000 करोड़ रुपये तक की बचत कंपनी के पुनरुद्धार की संभावनाओं को मजबूत करेगी।
 हालांकि, अंतिम निर्णय सरकार और टेलीकॉम विभाग की चर्चाओं पर निर्भर करेगा।

सरकार यदि इस नीति को लागू करती है, तो यह भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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