ट्रम्प के टैरिफ का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 26% रिसिप्रोकल टैरिफ लागू करने के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। आईटी सेक्टर, केमिकल सेक्टर और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जबकि फार्मा सेक्टर में कुछ खरीदारी देखी गई है।
आईटी सेक्टर में भारी गिरावट
-
भारतीय आईटी सेक्टर पर इस टैरिफ का सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
-
TCS, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों के शेयरों में 4% तक गिरावट देखी गई।
-
चूंकि आईटी सेवाएं भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट में शामिल हैं, इस टैरिफ के चलते आईटी बिज़नेस पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
केमिकल सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव
टैरिफ लागू होने के बाद भारतीय केमिकल सेक्टर में गिरावट देखी गई। नवीन फ्लोरीन, पीआई इंडस्ट्रीज, यूपीएल और एसआरएफ जैसे स्टॉक्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
-
अमेरिका भारतीय केमिकल इंडस्ट्री का बड़ा खरीदार है, इसलिए टैरिफ बढ़ने से इस सेक्टर में दबाव बढ़ सकता है।
-
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए ऑर्डर मिलने में कठिनाई होगी और मार्जिन पर भी असर पड़ेगा।
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी दबाव
-
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का 3% निर्यात अमेरिका को होता है।
-
ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री की कुल वैल्यू 21 बिलियन डॉलर है, जिसका एक तिहाई निर्यात प्रभावित हो सकता है।
-
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऑटो सेक्टर पर टैरिफ का असर लंबा चला तो इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है।
ट्रम्प टैरिफ किन देशों पर क्या असर पड़ेगा?
देश | टैरिफ प्रतिशत |
---|---|
भारत | 26% |
यूरोपीय संघ | 20% |
जापान | 24% |
दक्षिण कोरिया | 25% |
चीन | 54% |
इस फैसले से अमेरिका को भी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इंपोर्ट महंगा होगा और अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी।
क्या यह ग्लोबल मंदी की शुरुआत हो सकती है?
विश्लेषकों के अनुसार, इस टैरिफ का असर सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी, जिससे वहां डिमांड कम होगी।
अमेरिकी कंपनियां लागत घटाने के लिए छंटनी कर सकती हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी।
ग्लोबल ट्रेड स्लो हो सकता है, जिससे मंदी की संभावना बढ़ सकती है।
अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो यह एक ग्लोबल मंदी की शुरुआत हो सकती है।
निष्कर्ष निवेशकों को क्या करना चाहिए?
-
आईटी और केमिकल सेक्टर में निवेश फिलहाल जोखिम भरा हो सकता है।
-
फार्मा और डिफेंस सेक्टर में निवेश के मौके बन सकते हैं, क्योंकि इन पर कम असर पड़ेगा।
-
लॉन्ग-टर्म निवेशक गिरावट में अच्छे स्टॉक्स खरीदने पर विचार कर सकते हैं।
-
छोटे निवेशकों को वोलाटिलिटी से बचने के लिए स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए।