ट्रंप ने भारत और चीन पर भारी टैरिफ लगाए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत, चीन और अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की। इसके साथ ही, उन्होंने 2 अप्रैल को “लिबरेशन डे” (मुक्ति दिवस) घोषित करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन बताया। ट्रंप के अनुसार, यह फैसला अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और व्यापारिक संतुलन स्थापित करने के लिए लिया गया है।
अमेरिका के साथ अन्याय का आरोप
व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में दिए गए अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि दशकों से अमेरिका को व्यापारिक समझौतों में नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने अन्य देशों पर आरोप लगाया कि वे अमेरिका के संसाधनों का दुरुपयोग और शोषण कर रहे हैं। इसी के जवाब में उन्होंने “प्रतिशोधात्मक टैरिफ” (Retaliatory Tariffs) लागू करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य अन्य देशों द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए करों के मुकाबले संतुलन बनाना है।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका इन टैरिफ को पूरी दर से नहीं वसूलेगा, बल्कि यह शुल्क अन्य देशों द्वारा लगाए गए करों का केवल 50% होगा।
भारत और चीन पर बढ़ा शुल्क
ट्रंप प्रशासन ने विशेष रूप से भारत और चीन के लिए “रियायती प्रतिशोधात्मक टैरिफ” की घोषणा की, जिसमें
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भारत पर 26% टैरिफ
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चीन पर 34% टैरिफ
इसके अलावा, अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी अलग-अलग दरों से शुल्क लगाया गया है:
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यूरोपीय संघ (EU) पर 20%
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ब्रिटेन पर 10%
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जापान पर 24%
साथ ही, अमेरिका में आयातित सभी उत्पादों पर पहले से ही 10% का आधार शुल्क लागू रहेगा। विदेशी निर्मित ऑटोमोबाइल्स (गाड़ियों) पर विशेष रूप से 25% टैरिफ लगाया गया है, जिससे ऑटोमोबाइल उद्योग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।
टैरिफ लागू होने की तारीखें
व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह टैरिफ राष्ट्रीय आपातकाल के तहत तत्काल प्रभाव से लागू किए जा रहे हैं।
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सभी अमेरिकी आयातों पर 10% आधार शुल्क – 5 अप्रैल, सुबह 9:30 बजे (IST) से लागू
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देश-विशेष टैरिफ (भारत, चीन, EU आदि) – 9 अप्रैल, सुबह 9:30 बजे (IST) से लागू
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विभिन्न उद्योगों पर इन टैरिफ का असर कैसे पड़ेगा, लेकिन इतना तय है कि यह निर्णय अमेरिका के व्यापारिक भागीदारों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
ट्रंप की इस नई व्यापार नीति से वैश्विक व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। भारत और चीन जैसे उभरते बाजारों को इस फैसले से झटका लग सकता है, जिससे उनकी अमेरिका के साथ व्यापारिक गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ नीति व्यापारिक तनाव को और बढ़ा सकती है और कई देशों को जवाबी कार्रवाई के लिए मजबूर कर सकती है। इसके अलावा, यह नीति अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी असर डाल सकती है, क्योंकि आयातित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
निष्कर्ष
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ये नए टैरिफ वैश्विक व्यापार संतुलन को हिला सकते हैं। भारत और चीन जैसे देशों पर अतिरिक्त शुल्क से व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल मचने की संभावना है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य देश इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और वैश्विक व्यापार का भविष्य किस दिशा में जाता है।