ट्रंप के टैरिफ फैसले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ लगाने के हालिया फैसले ने पूरी दुनिया के शेयर बाजारों को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार शाम अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जहां डाउ जॉन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में करीब 5.5 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। वहीं, S&P 500 ने मार्च 2020 के बाद सबसे खराब क्लोजिंग दर्ज की।
5 ट्रिलियन डॉलर हुआ गायब, भारत की GDP से भी अधिक नुकसान
पिछले दो कारोबारी दिनों में अमेरिका के शेयर बाजारों से लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैप मिट गया है। तुलना करें तो भारत की कुल GDP करीब 4 ट्रिलियन डॉलर है, यानी अमेरिका ने महज़ 48 घंटों में भारत से भी ज्यादा मूल्य की संपत्ति बाजार से खो दी है। यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का संकेत है।
‘मुक्ति दिवस’ बना आर्थिक संकट का दिन
राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 अप्रैल को नए टैरिफ लागू करने की घोषणा की, जिसे उन्होंने अमेरिका की ‘आर्थिक स्वतंत्रता’ का प्रतीक बताया। लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया इसके बिल्कुल उलट रही। निवेशकों में डर का माहौल है। कई एक्सपर्ट्स इसे आधुनिक ट्रेड वॉर की शुरुआत मान रहे हैं, जहां देश एक-दूसरे पर टैरिफ लगाकर जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं।
निवेशक हो रहे सतर्क, बाजार में अनिश्चितता का माहौल
ट्रंप की टैरिफ नीति ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरे वैश्विक निवेश समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। निवेशक अब बेहद सतर्क हो गए हैं और अनिश्चितता का माहौल छाया हुआ है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के झटके का असर एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी महसूस किया गया है।
निष्कर्ष
ट्रंप द्वारा उठाया गया यह टैरिफ कदम न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। बाजार से 5 ट्रिलियन डॉलर का वाष्पीकृत हो जाना यह दर्शाता है कि वैश्विक निवेशकों में डर गहराता जा रहा है। यदि यह टैरिफ युद्ध लंबा चलता है, तो इसके प्रभाव और भी व्यापक हो सकते हैं—बेरोजगारी, निवेश में गिरावट, और आर्थिक मंदी तक की आशंका जताई जा रही है।