मुद्रास्फीति क्या है

मुद्रास्फीति क्या है? कारण, प्रकार और प्रभाव

मुद्रास्फीति क्या है? 

मुद्रास्फीति  की परिभाषा

मुद्रास्फीति का अर्थ है किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि, जिससे मुद्रा की क्रय शक्ति (Purchasing Power) घटती है। सरल शब्दों में, जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो समान राशि में पहले की तुलना में कम वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं।

मुद्रास्फीति क्या है

मुद्रास्फीति के कारण

मुद्रास्फीति मुख्य रूप से मनी सप्लाई (Money Supply) में वृद्धि के कारण होती है। इसके कुछ प्रमुख कारण हैं

मौद्रिक नीति (Monetary Policy) और मुद्रा आपूर्ति – जब केंद्रीय बैंक अधिक मुद्रा छापता और वितरित करता है, तो बाजार में पैसे की उपलब्धता बढ़ जाती है, जिससे महंगाई हो सकती है।

सरकारी बांड की खरीद (Government Bonds Purchase) – जब सरकार बैंकों से सरकारी बांड खरीदती है, तो इससे बैंकों के पास अधिक नकदी आती है, जिससे ऋण (Loans) बढ़ते हैं और मुद्रास्फीति को बढ़ावा मिलता है।

मुद्रा का अवमूल्यन (Currency Depreciation) – यदि किसी देश की मुद्रा कमजोर होती है, तो आयात (Imports) महंगे हो जाते हैं, जिससे वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है।

मुद्रास्फीति के प्रकार

मुद्रास्फीति को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा जाता है

 मांग-प्रेरित मुद्रास्फीति (Demand-Pull Inflation)

जब किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कुल मांग (Aggregate Demand) उनकी आपूर्ति (Supply) से अधिक हो जाती है, तो कीमतें बढ़ने लगती हैं।
कारण
 लोगों की आय (Income) बढ़ने से अधिक खर्च (Spending) होना
 कम ब्याज दरों (Interest Rates) से अधिक ऋण (Loan) लेना
 सरकार द्वारा सार्वजनिक खर्च (Government Spending) बढ़ाना

 लागत-प्रेरित मुद्रास्फीति (Cost-Push Inflation)

मुद्रास्फीति क्या है

जब उत्पादन लागत (Production Cost) में वृद्धि होती है, तो कंपनियां अधिक कीमतें चार्ज करने लगती हैं।
कारण
कच्चे माल (Raw Materials) की बढ़ती कीमतें
मजदूरी (Wages) में बढ़ोतरी
ऊर्जा स्रोतों (Oil, Gas) की कीमतों में वृद्धि

 अंतर्निहित मुद्रास्फीति (Built-in Inflation)

जब उपभोक्ता और श्रमिक भविष्य में कीमतें बढ़ने की उम्मीद करने लगते हैं, तो कंपनियां उत्पादों की कीमतें बढ़ा देती हैं और कर्मचारी अधिक वेतन की मांग करते हैं।
कारण
कंपनियों द्वारा कीमतों में वृद्धि
श्रमिकों द्वारा उच्च वेतन की मांग
मजदूरी-मूल्य सर्पिल (Wage-Price Spiral) का बनना

मुद्रास्फीति दर (Inflation Rate) कैसे मापी जाती है?

मुद्रास्फीति को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) के आधार पर मापा जाता है।

मुद्रास्फीति दर का सूत्र

मुद्रास्फीति दर=(अंतिम CPI−प्रारंभिक CPI)प्रारंभिक CPI×100\text{मुद्रास्फीति दर} = \frac{(\text{अंतिम CPI} – \text{प्रारंभिक CPI})}{\text{प्रारंभिक CPI}} \times 100

 यह प्रतिशत में दर्शाता है कि किसी निश्चित समय में कीमतें कितनी बढ़ी हैं।

मुद्रास्फीति का आर्थिक प्रभाव

नुकसान
 क्रय शक्ति घटती है, जिससे उपभोक्ता वस्तुएं कम खरीद पाते हैं।
 बचत (Savings) का मूल्य घट जाता है।
 उच्च मुद्रास्फीति से ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ सकती हैं।

लाभ
 मध्यम मुद्रास्फीति आर्थिक विकास (Economic Growth) को बनाए रखती है।
 कंपनियों के लाभ बढ़ते हैं, जिससे निवेश (Investment) आकर्षित होता है।
 सरकार पर कर्ज चुकाने का भार कम हो सकता है।

निष्कर्ष

मुद्रास्फीति किसी भी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक है। अगर यह नियंत्रण में रहती है, तो अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक होती है, लेकिन अत्यधिक बढ़ने पर यह संकट ला सकती है

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *